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किंवदंती

इतिहास

बरनवाल (वरनवाल, वर्नवाल, बर्णवाल के रूप में भी प्रतिष्ठित)

एक हिन्दू वैश्य समुदाय है जो राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित पूरे उत्तरी, मध्य और पश्चिमी भारत में पाया जाता है। बरनवाल जाति अग्रवाल, पोद्दार, माहेश्वरी , जाति की तरह उच्च वैश्य समुदाय के होते है।

बरनवाल पौराणिक सूर्यवंश के राजपूत राजा अहिबरन से वंशज हैं।[4] वस्तुतः, बरनवाल का अर्थ है "अहिबरन के बालक" या "बरन के रहने वाले", उत्तर प्रदेश का बरन जिला जो वर्तमान समय मे बुलंदशहर के नाम से जाना जाता है,[5] जिसे महाराजा अहिबरन ने स्थापित किया था। बरनवाल समाज में बिधायक, राज नेता, प्रशासनिक पदाधिकारी,चिकित्सक ,अभियंता, समाजसेवी,पत्रकार, ब्यापारी है जैसे त्रिवेणी बरनवाल,भुवनेश्वर बरनवाल,बिंधयाचल बरनवाल,डा0 सुनील बरनवाल डा0 श्री प्रकाश बरनवाल,बरूण बरनवाल, बिश्वनाथ मोदी,बद्री नारायण बरनवाल,मुन्ना बरनवाल,बिरंची लाल बरनवाल आदि.

गोत्र

गोत्र

बरनवालों के गोत्र

बजाज, ढेक, सेठ, मोदी, मकरिया (मकरीया), सम्भलपुरिया, पंचलोखरिया (पंचलोखरीया), जेरफुरिया (जेरफुरीवा), सेरातन ( सरोतन), लोखरिया (लोखरीया), अतरासीवाल, बेरिया (बैरिया, वेरीया), कठारिया (काठरिया, कटारिया ), कुलीन (कुलीनमुरत), मोदी, जपखरिया (जैखरीया), सोनपुरिया (सोनपुरया), नैरचैया (नेरचैया), खरवसया, वदऊआ (वदउया), रुपिहा (रूपीहा ), कसाजिआ (कशिजिया, कासाजीया ), टेकमनियाँ ( टेक मनिया), मिरीचिया (मीरीचीया), धगर, नकवरियाँ, मनहरिया, बबुकनसिया (ववुकनसीया), खेलावन ( खेलाउन), ठेलरिया (ठेलरीया), ककरिया (ककरीया), बक्शी, सिमरिया, गुंधेले, लाला, नागर, इमिलिया, गुहिया, कोटवाले, लेडिया, चिकरिया, सत्पुत्र, पिंडार, गोयल, कांकिया, कनुंगोय, कटरावाले, पटवारी, कठैरिया, मालहन, पुरवार, चौधरी (चौधरिया, चौधरीया), मनिया (मनीया), ढिगा, ठग, पटसरिया (परसारिया, पठसरिया), बैद्य या हकीम, मोरिल, बटराज (वटराट), मुसद्दी नमलीन।

बरनवाल में प्रयोग होने वाले उपनाम

प्रसाद, साह, बरनवाल, वर्णवाल, बर्नवाल, गोयल, मित्तल, सिंघल, गोहिल, गोविल, महाजन, पोद्दार, सेठ, गुप्ता, गुप्त, साव, मोदी

प्रशंसनीय व्यक्तित्व

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